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Friday, June 14, 2019

वो क्या अफसोस करेगा मेरे ना होने पे .....

यूं तो कटे हुए उस पेड़ को एक जमाना हो गया,
मगर ढूंढते अपना ठिकाना परिंदे का अक्सर यहां आना हो गया l

निकले थे हम इस आस में किसी को बना लेंगे अपना ,
पर इस ख्वाहिश नें …
उम्र भर के लिए दे दिया आंखों को टूटा हुआ एक सपना l



किसी ने थोड़ा सा वक्त दिया था मुझे ,
मैंने आज तक उसे इश्क समझ संभाल रखा है ,
अब यह न पूछना कि यह अल्फाज कहां से लाते हो,
क्योंकि हमने भी दर्द एक दिल में पाल रखा है l

छुपे छुपे से रहते हैं सरेआम नहीं होते ,
कुछ रिश्ते महसूस होते हैं उनके नाम नहीं होते ,
वह गए तन्हा छोड़ कर और वजह तक न बताई,
हमने पूछा उनसे तो कह गए हमें पसंद है तन्हाई l

उन्हें हमारी खामोशी पसंद आ गई ,
और हम बेजुबां हो गए,
रोता देख हमें वो यह कहकर चले गए ,
रोता तो हर कोई है, क्या हम सबके हो गए l

मौसम से वह बहुत अलग तो नहीं थे ,
क्योंकि बदलने का हुनर उन्हें भी आता है ,
लेकिन हमें अब समझ आया रिश्ते मतलब के ही अच्छे हैं,
क्योंकि बेमतलब के रिश्तों का मतलब ही कहां होता है l

परीक्षा में आए मुश्किल सवाल सा हूं मैं,
मुझे बीना समझे उसने छोड़ा है ,
याद तो उसे आज भी करता हूं मैं ,
पर कितना करता हूं , बस बताना छोड़ा है l

एक अरसे पहले उसने कहा था इंतजार करना ,
पर हमें महंगा पड़ गया उसपर एतबार करना ,
क्योंकि ...
जो कभी डरा ही नहीं मुझे खोने से ,
वो क्या अफसोस करेगा मेरे ना होने पे ….
......
जो कभी डरा ही नहीं मुझे खोने से ….
वो क्या अफसोस करेगा मेरे ना होने पे ll

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