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Wednesday, April 10, 2019

संघर्ष किसे कहते हैं.....


संघर्ष किसे कहते हैं ?
......संघर्ष किसे कहते हैं ?
जब कोई आपके साथ ना खड़ा हो ,
फिर भी आप मंज़िल की ओर बढ़ते चले जाएं ।
जब कोई आपके साथ ना खड़ा हो ,
फिर भी आप मंज़िल की ओर बढ़ते चले जाएं ।।
शायद संघर्ष उसे कहते हैं ,
शायद संघर्ष उसे कहते हैं ।


......संघर्ष किसे कहते है ?
जब सामने अंधेरा छा जाए ,
जब सामने अंधेरा छा जाए ,
मंज़िल तक पहुंचने की राह धूमिल हो जाए ,
जब सामने अंधेरा छा जाए ,
मंज़िल तक पहुंचने की राह धूमिल हो जाए ।
शायद संघर्ष उसे कहते हैं ,
शायद संघर्ष उसे कहते हैं ।


......संघर्ष किसे कहते है ?
जब सभी हार मान लें और तुम्हारा होंसला तोड़ दे ,
जब सभी हार मान लें और तुम्हारा होंसला तोड़ दे ।
फिर भी तुम अगर होंसला जोड़े रखो ,
फिर भी तुम अगर होंसला जोड़े रखो ,
मंज़िल की तरफ अपनी कोशिश मोडे़ रखो ,
मंज़िल की तरफ अपनी कोशिश मोडे़ रखो ।
तो शायद उसे संघर्ष कहते हैं ,
तो शायद उसे संघर्ष कहते हैं।

......संघर्ष किसे कहते हैं ?
जिन राहों पर चलने से लोग डरते हैं ,
जिन राहों पर चलने से लोग डरते हैं ,
अगर तुम उन राहों पर चल कर मंज़िल पा लो ,
अगर तुम उन राहों पर चल कर मंज़िल पा लो ।
तो शायद संघर्ष उसे कहते हैं ,
तो शायद संघर्ष उसे कहते हैं ।

......संघर्ष किसे कहते हैं ?
अगर तुम असफलता के दलदल में फंस जाओ ,
अगर तुम असफलता के दलदल में फंस जाओ ,
और अपनी मेहनत से कमल के फूल सा खिल जाओ ,

अगर तुम असफलता के दलदल में फंस जाओ ,
और अपनी मेहनत से कमल के फूल से खिल जाओ  
तो शायद संघर्ष उसे कहते हैं ,
तो शायद संघर्ष उसे कहते हैं ।

.......संघर्ष किसे कहते हैं ?
जब दिन में भी आंखो के सामने अंधेरा छा जाए ,
और वक़्त तुम्हारा तुम्हे हराने के लिए आतुर हो जाए ,
जब दिन में भी आंखो के सामने अंधेरा छा जाए ,
और वक़्त तुम्हारा तुम्हे हराने के लिए आतुर हो जाए ,
फिर अगर तुम अंधेरे को भी अपनी मेहनत से उजाले में बदल दो ,
फिर अगर तुम अंधेरे को भी अपनी मेहनत से उजाले में बदल दो ,
और धूमिल उम्मीदों में भी अपनी मंज़िल पा लो ,
और........ धूमिल उम्मीदों में भी अपनी मंज़िल पा लो ।
तो शायद संघर्ष उसे कहते हैं ,
तो शायद संघर्ष उसे कहते हैं ।।



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