Thursday, April 25, 2019

Election Commission Credibility & Indian general election, 2019

Introduction:
Election Commission of India (ECI) is a constitutional body under Article-324 vested with the responsibilities of superintendence, direction, and control of the conduct of elections. It consists of a Chief Election Commissioner and two Election Commissioners.
 The Election Commission of India (EC) is a formidable institution which has led the world in electoral efficiency since its inception.


For a constitutional body that was meant to conduct elections in a free and fair manner, the Election Commission (EC) has come under the scanner for recent actions in Indian general election, 2019.
The criticism has come not from one source but a lot of sources, including political leaders, organizations and civil servants.  The institution is seen as increasingly impotent in the face of aggressive forces. In fact, Yogendra Yadav, president of the Swaraj India Party, went so far as to say: “Every day I think that the Election Commission has sunk to its lowest, only to be proved wrong the next day!”
Perhaps that is the reason why the EC on March 10 banned the screening of Modi’s biopic temporarily. It said political content like biopics pose a “serious threat to the level playing field as it may create an impression of the truthfulness of such content being shown through television/cinema/Internet-based entertainment programmes/social media”. The EC order came a day before the movie was to be released. The order also applies to NaMo TV which too cannot be aired during the poll period. In fact, on April 9, 48 hours before voters in the first phase of polling concluded voting and when further campaigning was disallowed, NaMo TV continued to broadcast and showed Modi’s speeches even after the 5 pm deadline. It is believed that the EC’s order will also apply to the 10-part web series Modi: Journey of a Common Man which is being streamed on Eros Now platforms.
On April 8, in a letter to the President of India, a group of retired bureaucrats and diplomats, in the context of recent incidents, expressed concern over the EC’s “weak-kneed conduct” and the institution “suffering from a crisis of credibility today”.
The letter described the Prime Minister’s March 27 announcement, of India’s first anti-satellite (ASAT) test, as a “serious breach of propriety, which giving unfair publicity to the party in power”. Questions were also raised over the launch of NaMo TV without license, and a biopic on the life of the Prime Minister which was scheduled for release on April 11, when elections commenced.
Other important issues highlighted in the letter included transfers of top officials, voter-verifiable paper audit trail (VVPAT) audits, violations of the MCC by Rajasthan Governor Kalyan Singh (for which the group has requested his removal on account of “grave misdemeanor”) and Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath (in his speech he referred to the armed forces as the army of Narendra Modi).
With polling underway, the Model Code of Conduct (MCC) has also come into force. But the EC has largely failed in enforcing the MCC. With six more phases to go in the polls for the 543 parliamentary constituencies, it is a moot question as to how many more violations will take place and how the EC will react to them. This is an appropriate time also to review the functioning of this constitutional body and the way the MCC is being implemented on the ground.

What is MCC?
The MCC refers to a set of norms/ guidelines laid down by the EC with the consensus of political parties. It is not statutory. It spells out the dos and don’ts for elections. Political parties, candidates and polling agents are expected to observe the norms on matters ranging from the content of election manifestos, speeches and processions, to general conduct so that free and fair elections take place.
It is imperative for the EC to ensure that all political parties, particularly the ruling ones at the centre and in states, adhere to the Code. It has devised several mechanisms to take note of MCC violations, which include an army of observers, joint task forces of enforcement agencies and flying squads. The latest is the introduction of the cVIGIL mobile app through which audio-visual evidence of malpractices can be tracked and reported.

Conclusion:
Elections are the bedrock of democracy and the EC’s credibility is central to democratic legitimacy.
The independence of the Commission can be strengthened further if the Secretariat of the Election Commission consisting of officers and staff at various levels are also insulated from the interference of the Executive in the matters pertaining to their appointments, promotions, etc. It is time that action is taken to depoliticize constitutional appointments and the EC empowered to de-register parties for electoral misconduct.
It is a step needed towards restoring all-important public faith in the Election Commission otherwise India a largest democracy of the world is failing to protect its own democracy...


Thursday, April 18, 2019

वो किताबों में दर्ज था ही नहीं........


बहुत कुछ सिखाया है तूने ऐ जिंदगी,
बहुत कुछ सिखाया है तूने ऐ जिंदगी,
पर जो जमाने ने सिखाया…
वो किताबों में दर्ज था ही नहीं l
पर जो जमाने ने सिखाया…
वो किताबों में दर्ज था ही नहीं ll

कुछ अच्छा सिखाया, कुछ बुरा सिखाया,
जिंदगी की हर ठोकर ने मुझे सबक सिखाया,
कुछ अच्छा सिखाया, कुछ बुरा सिखाया,
जिंदगी की हर ठोकर ने मुझे सबक सिखाया,
पर जो जमाने ने सिखाया…
वो किताबों में दर्ज था ही नहीं l
पर जो जमाने ने सिखाया...
वो किताबों में दर्ज था ही नहीं ll

कुछ अपनों ने सिखाया, कुछ गैरों ने सिखाया,
कुछ इस जिंदगी से जुड़े सपनों ने सिखाया,
कुछ अपनों ने सिखाया, कुछ गैरों ने सिखाया,
कुछ इस जिंदगी से जुड़े सपनों ने सिखाया,
पर जो जमाने ने सिखाया…
वो किताबों में दर्ज था ही नहीं l
पर जो जमाने ने सिखाया...
वो किताबों में दर्ज था ही नहीं ll

कुछ घर में सिखाया, कुछ बाहर जाकर,
कुछ गांव में सिखाया, कुछ शहर जाकर,
पर जो जमाने ने सिखाया…
वो किताबों में दर्ज था ही नहीं l
जो जमाने ने सिखाया...
वो किताबों में दर्ज था ही नहीं ll

कुछ हंसी ने सिखाया, तो कुछ अश्कों ने,
कुछ खुशी ने सिखाया, तो कुछ गमों ने,
 पर जो जमाने ने सिखाया…
वो किताबों में दर्ज था ही नहीं l
पर जो जमाने ने सिखाया…
वो किताबों में दर्ज था ही नहीं II


Sunday, April 14, 2019

ये किताबें कुछ कहती है.......


ये  किताबें कुछ कहती है ,
ये  किताबें कुछ कहती है,
मेज पर आधी खुली आधी बंद ,
ये  किताबें कुछ कहती हैं ।।


मेरी जिंदगी से जुड़े किसी रिश्ते की तरह,
नाता है दिल से इनका मेरी सांसो की तरह,
निभाती है साथ मेरा अपनों की तरह,
सिखाती है जीना मुझे बेफिकरों की तरह ,
करती है दूर मेरे अकेलेपन को दोस्तों की तरह
दिखाती है रास्ता मुझे मेरे अपनों की तरह।।

कौन देता है साथ इस तरह मतलबी सी इस दुनिया में ,
कौन बांधता है उम्मीदों की डोर फरेबी सी इस दुनिया में ,
कौन देता है साथ किसी के अकेलेपन में ,
कौन दिखाता है राह किसी के अंधेरे जीवन में….

बेशक..
ये किताबें ही है जो देती है साथ अकेलेपन मे,
दिखाती है राह अंधेरे जीवन …….
ये किताबें ही है जो देती है साथ अकेलेपन मे,
दिखाती है रहा अंधेरे जीवन …….
...
इसी लिए,
...
जब भी बैठ जाता हूं थक हार के ,
ये किताबें कुछ कहती है प्यार से,
जब भी बैठ जाता हूं थक हार के,
ये किताबें कुछ कहती है प्यार से ।।



Wednesday, April 10, 2019

संघर्ष किसे कहते हैं.....


संघर्ष किसे कहते हैं ?
......संघर्ष किसे कहते हैं ?
जब कोई आपके साथ ना खड़ा हो ,
फिर भी आप मंज़िल की ओर बढ़ते चले जाएं ।
जब कोई आपके साथ ना खड़ा हो ,
फिर भी आप मंज़िल की ओर बढ़ते चले जाएं ।।
शायद संघर्ष उसे कहते हैं ,
शायद संघर्ष उसे कहते हैं ।


......संघर्ष किसे कहते है ?
जब सामने अंधेरा छा जाए ,
जब सामने अंधेरा छा जाए ,
मंज़िल तक पहुंचने की राह धूमिल हो जाए ,
जब सामने अंधेरा छा जाए ,
मंज़िल तक पहुंचने की राह धूमिल हो जाए ।
शायद संघर्ष उसे कहते हैं ,
शायद संघर्ष उसे कहते हैं ।


......संघर्ष किसे कहते है ?
जब सभी हार मान लें और तुम्हारा होंसला तोड़ दे ,
जब सभी हार मान लें और तुम्हारा होंसला तोड़ दे ।
फिर भी तुम अगर होंसला जोड़े रखो ,
फिर भी तुम अगर होंसला जोड़े रखो ,
मंज़िल की तरफ अपनी कोशिश मोडे़ रखो ,
मंज़िल की तरफ अपनी कोशिश मोडे़ रखो ।
तो शायद उसे संघर्ष कहते हैं ,
तो शायद उसे संघर्ष कहते हैं।

......संघर्ष किसे कहते हैं ?
जिन राहों पर चलने से लोग डरते हैं ,
जिन राहों पर चलने से लोग डरते हैं ,
अगर तुम उन राहों पर चल कर मंज़िल पा लो ,
अगर तुम उन राहों पर चल कर मंज़िल पा लो ।
तो शायद संघर्ष उसे कहते हैं ,
तो शायद संघर्ष उसे कहते हैं ।

......संघर्ष किसे कहते हैं ?
अगर तुम असफलता के दलदल में फंस जाओ ,
अगर तुम असफलता के दलदल में फंस जाओ ,
और अपनी मेहनत से कमल के फूल सा खिल जाओ ,

अगर तुम असफलता के दलदल में फंस जाओ ,
और अपनी मेहनत से कमल के फूल से खिल जाओ  
तो शायद संघर्ष उसे कहते हैं ,
तो शायद संघर्ष उसे कहते हैं ।

.......संघर्ष किसे कहते हैं ?
जब दिन में भी आंखो के सामने अंधेरा छा जाए ,
और वक़्त तुम्हारा तुम्हे हराने के लिए आतुर हो जाए ,
जब दिन में भी आंखो के सामने अंधेरा छा जाए ,
और वक़्त तुम्हारा तुम्हे हराने के लिए आतुर हो जाए ,
फिर अगर तुम अंधेरे को भी अपनी मेहनत से उजाले में बदल दो ,
फिर अगर तुम अंधेरे को भी अपनी मेहनत से उजाले में बदल दो ,
और धूमिल उम्मीदों में भी अपनी मंज़िल पा लो ,
और........ धूमिल उम्मीदों में भी अपनी मंज़िल पा लो ।
तो शायद संघर्ष उसे कहते हैं ,
तो शायद संघर्ष उसे कहते हैं ।।



Monday, April 8, 2019

कुछ तो याद होगा तुम्हे ....

कुछ तो याद होगा तुम्हे पुरानी गली पर आखरी मकान किसका है ,
......कुछ तो याद होगा तुम्हे पुरानी गली पर आखरी मकान किसका है
अगर सब कुछ भूल गए हो तो ,
.....अगर सब कुछ भूल गए हो तो,
ये तो ज़रूर याद होगा ,
पुरानी गली की दीवार पर आखरी नाम किसका है ,
....पुरानी गली की दीवार पर आखरी नाम किसका है।

माना के वक़्त मेरे साथ नहीं था,
...माना के वक़्त मेरे साथ नहीं था,
लेकिन ,
मेरे हाथ में तुम्हारा हाथ भी तो नहीं था ,
....मेरे हाथ में तुम्हारा हाथ भी तो नहीं था।

हो सकता है इंसान का वक़्त बुरा हो ,
...हो सकता है इंसान का वक़्त बुरा हो ,
पर ज़रूरी नहीं इंसान भी बुरा हो ,
....पर ज़रूरी नहीं इंसान भी बुरा हो।

अब तेरे जाने का कोई फ़र्क नहीं पड़ता ,
...अब तेरे जाने का कोई फ़र्क नहीं पड़ता,
तुझे और क्या कहूं , तेरे होने से भी कोई फ़र्क नहीं पड़ता
.......तुझे और क्या कहूंतेरे होने से भी कोई फ़र्क नहीं पड़ता।

छोड़  चुका हूं तुझे मैं पीछे ,
....छोड़ चुका हूं तुझे मैं पीछे,
बहुत पीछे ,
उस राह पर जहां तूने छोड़ा था मुझे 


अब तू दोबारा से सामने आई है ,
अब तू दोबारा से सामने आई है,
तो तेरे सामने आने पर भी मुझे फ़र्क नहीं पड़ता 
......तो तेरे सामने आने पर भी मुझे फ़र्क नहीं पड़ता।

खुश हूं बहुत के तूने छोड़ा था मुझे ,
खुश हूं बहुत के तूने छोड़ा था मुझे,
इसी से एहसास हुआ तेरे होने या ना होने का ......
इसी से एहसास हुआ तेरे होने या ना होने का,
मेरी ज़िन्दगी पर फ़र्क नहीं पड़ता ,
मेरी.... ज़िन्दगी पर फ़र्क नहीं पड़ता।

दुख तो बहुत है ,
दुख तो बहुत है.....
के हमने तुझे दिल से चाहा ,
पर अब कमबख्त इस दिल को तेरे होने या ना होने का भी फ़र्क नहीं पड़ता ,
....पर अब कमबख्त इस दिल को तेरे होने या ना होने का भी फ़र्क नहीं पड़ता।
.......तेरे होने या ना होने का भी फ़र्क नहीं पड़ता II

Also watch on youtube :
https://www.youtube.com/watch?v=ICnzzZlAUhM