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Tuesday, September 10, 2019

ये एक तरफा इश्क है साहब......

उससे मिलने की ख्वाहिश तो कम नहीं होती,
 पर जब वो सामने आए तो आंखें झुका गुजर जाना पड़ता है,
 ये एक तरफा इश्क है साहब, इसे छुपाना पड़ता है।


ना चाहते हुए भी दिल को मनाना पड़ता है,
 उसके ख्वाबों में डूबे खुद को जगाना पड़ता है,
ये एक तरफा इश्क है साहब, इसे हर दिन जताना पड़ता है।

कभी-कभी लगता है हम तेरे बगैर ही अच्छे हैं,
 क्योंकि, इस इश्क में खुद को भुलाना पड़ता है,
 ये एक तरफा इश्क है साहब, इसे निभाना पड़ता है।

ना चाहते हुए भी उसकी यादों में खो जाना पड़ता है,
 फिर देख उसकी तस्वीर खुद को समझाना पड़ता है,
ये एक तरफा इश्क है साहब, इसमें चेहरों को भुलाना पड़ता है।

मुकम्मल कहां ये मेरे इश्क का फसाना है,
 यहां हर दिन उसकी याद में खुद को जलाना पड़ता है,
ये एक तरफा इश्क है साहब, इसे छुपाना पड़ता है….. 
ये एक तरफा इश्क है साहब, इसे निभाना पड़ता है।।

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Tuesday, August 27, 2019

अब अर्थव्यवस्था हमारी निराधार है .....

अर्थव्यवस्था अर्थहीन है,
 रोजगार के द्वार हिन है,
 पर राम मंदिर वोट की मशीन है ।


आज विपक्ष मौन है,
अब मीडिया गुलाम है ,
और सत्ताधारी पूछ रहा, देश-भक्त कौन है?

धर्म के नाम पर खून माफ है,
 अपराधी नेता का चरित्र साफ है,
अब अदालतों में भटकता इंसाफ है।

अयोध्या में हिंदू मुस्लिम की बात है,
 वोट के लिए राम अली  साथ साथ है,
 पुलवामा के पीछे मत पूछो किसका हाथ है।

देश में बढ़ता नशे का व्यापार है,
 देश में घटता रोज़गार है,
 पर सत्ता से मत पूछो युवा क्यों बेरोजगार है।

इज़्ज़त नारी की हो रही तार-तार है,
 पानी के लिए चारों तरफ हाहाकार है,
 अब क्यों काले धन पर चुप सरकार है।

गलत नीतियों की जय जयकार है ,
अब अर्थव्यवस्था हमारी निराधार है,
आज देश में मंदी से मची हाहाकार है …
अब अर्थव्यवस्था हमारी निराधार है।
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